ध्रुवतारा…

Dedicated to,

My best friend, Jady,

Who also happens to be the biggest fan of my poems.

Happy Birthday Dear,

Hope you like it!

बंजारों सी इस ज़िन्दगी में,
सब कुछ था बदलता रहा,
न  कभी दोस्ती का मौका मिला,
न कभी बता सका किसी को अपना गिला -शिकवा।
जब बेमतलब सा लगने लगा था सब,
जब मेरा पूरा ज़ोर लगाने पर भी,
वो गद्दार आंसू, बाहर आ जाता था तब,
जब अकेलापन सा महसूस किया इस दुनिया में कभी,
तू ध्रुव तारे सी अटल, मेरे साथ बनी रही ..।।

चमकती-दमकती, आशा जगाती हुई,
तेरी रौशनी जगा देती मुझमे हौसला अजब।
बदलाव के सागर में सब थे बह गए,
लेकिन जब भी सर उठाया,
उस ही जगह पर तुझे पाया तब।
कोई तारा टिमटिमाता,
हर अमावस, चाँद भी दगा दे जाता,
लेकिन तेरी चमक का तेज़ न बदला कभी।
सब ग्रह-नक्षत्र अपनी जगह बदलते,
पर तुझको पाया आसमान में हर पल वहीँ।

बस ऐसे ही साथ निभाते रहना तू,
की ज़िन्दगी के बाद जब आत्मा परलोक  को जाये,
कह दूँ चित्रगुप्त को बुलंद आवाज़ में,
की मेरा आखरी स्थान, ध्रुवतारे के पास बनाए !!

2 thoughts on “ध्रुवतारा…

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